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हम्पी: कर्णाटक की प्राकृतिक सौंदर्य की निगाह

कर्णाटक, भारत का दक्षिण-पश्चिमी राज्य, अपने प्राकृतिक सौंदर्य, ऐतिहासिक महत्व, और धार्मिक महौल के लिए प्रसिद्ध है। हम्पी, इस राज्य का एक छोटा सा गाँव, एक बहुत ही महत्वपूर्ण प्राकृतिक स्थल है, जो अपने प्राचीन विरासत और आश्चर्यजनक मंदिरों के लिए प्रसिद्ध है। 

हम्पी का इतिहास

हम्पी, जिसे “हम्पी हैदराबाद” भी कहा जाता है, कर्णाटक के बेलारी जिले में स्थित है और इसका इतिहास कार्यकाल से जुड़ा हुआ है। यह गाँव होयसला वंश के शासकों का आधारभूत हुआ करता था, और यहां के धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों ने सदियों से लोगों का ध्यान आकर्षित किया है।

विरुपाक्षा मंदिर

हम्पी का प्रमुख आकर्षण है विरुपाक्षा मंदिर, जो होयसला वंश के राजा विरुपाक्ष द्वारा 13वीं सदी में निर्मित किया गया था। यह एक प्रमुख शैली का उदाहरण है और इसकी विशेषता होयसला शैली की सुंदर स्थानीय शिल्पकला का प्रदर्शन करने में है। मंदिर की मुख्य गोपुर की ऊँचाई, विभिन्न देवताओं की मूर्तियों के साथ, आकर्षक है, और यहाँ के मंदिर की विशेष बागीचा भी आकर्षण का केंद्र है।

हम्पी के अन्य मंदिर:

विरुपाक्षा मंदिर के अलावा, हम्पी में कई और मंदिर हैं, जैसे कि कदलिगोल मंदिर, हेमकूट मंदिर, और वीरभद्र मंदिर। ये मंदिर अपने अद्वितीय स्थलीय शैली और ऐतिहासिक महत्व के लिए प्रसिद्ध हैं, और प्राचीन काल की कला और शिल्प की अमूल

हम्पी के रोचक तथ्य

1.ऐतिहासिक महत्व: हम्पी एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक स्थल है जो होयसला वंश के अधिकार में था। यहां के मंदिर और शिल्पकला का विकास होयसला साम्राज्य के शासकों के द्वारा प्रायोगिक रूप से संवादित किया गया था।

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2. विरुपाक्षा मंदिर: हम्पी का सबसे प्रमुख मंदिर विरुपाक्षा मंदिर है, जो 13वीं सदी में निर्मित हुआ था। इसका नाम राजा विरुपाक्ष के नाम पर है और यह होयसला शैली की श्रेष्ठतम उदाहरणों में से एक है।

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3. अद्वितीय शिल्पकला: हम्पी के मंदिर अपनी अद्वितीय शिल्पकला के लिए प्रसिद्ध हैं। इन मंदिरों की शिल्पकला का खगोलशास्त्र, गीता, और पुराणों के कई किस्से और कथाओं से संवाद करती है।

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4. धार्मिक महत्व:हम्पी के मंदिर और स्थल धार्मिक महत्व के साथ आत्मीयता को भी प्रकट करते हैं। यहां विशेष त्योहारों पर हजारों श्रद्धालु आते हैं और अपनी धार्मिक आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए मंदिरों में पूजा-पाठ करते हैं।

5. हम्पी के फेस्टिवल: हम्पी में वर्षभर विभिन्न त्योहार मनाए जाते हैं, जिनमें वीरुपाक्षा कर्तिका महोत्सव, शिवरात्रि, और वार्षिक फेस्टिवल शामिल हैं। ये त्योहार विशेष धार्मिक और सांस्कृत

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हम्पी का निर्माण होयसला वंश के राजा विरुपाक्ष ने करवाया था। इसका निर्माण 13वीं सदी में हुआ था। इस महान मंदिर के निर्माण में करीब 87,00,000 गज़ यानी लगभग 81,000 वर्ग मीटर क्षेत्र का उपयोग हुआ था। यह मंदिर होयसला शैली का एक उत्कृष्ट उदाहरण है और इसकी शिल्पकला, वास्तुकला, और धार्मिक एवं सांस्कृत

हम्पी के मंदिरों की शिल्पकला का मुख्य रूप होयसला शैली की है, जो 12वीं से 13वीं सदी के बीच अपने शिल्पकला की उच्च शिखर पर थी। होयसला शैली की विशेषता उसके इंट्रिकेट और विस्तारणात्मक शिल्पकला में है, जिसमें विभिन्न देवताओं की मूर्तियाँ, लक्षण चित्रण, और गूढ़ रूप से बनी शिल्पकला का साहसी उपयोग किया गया है।

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होयसला शैली की शिल्पकला मंदिरों के गोपुर, मंदिर की दीवारों, और स्तूपों पर दिखाई देती है, जिससे यह शैली अद्वितीय है और कला के प्रेमीओं के बीच महत्वपूर्ण है।

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