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साइकोलॉजी क्या है? what Is Psychology

साइकोलॉजी क्या है

 

 

हमारे शरीर में मस्तिष्क एक ऐसा अंग है जो हमेशा से राश्याओं की गुठी बना रहा है। सिगमंड फ्रायड वह व्यक्ति थे जिन्होंने सर्वप्रथम इस बात को सबके समक्ष लाया कि पशु, पक्षी और मानव के दिमाग एक खास प्रणाली में कार्य करते है जिसके बारे में अध्ययन करके हम कुछ मूल सिद्धांतों को पता कर सकते है और उन सिद्धांतों के आधार पर मनुष्य के मस्तिष्क और उसके व्यवहार का एक अंदाजा लगाया जा सकता है इन सभी बातों ने सायकोलॉजी को एक विज्ञानिक स्तर पर स्थान दिया।आज Psychology In Hindi के इस आर्टिकल में हम आपको बताएंगे कि साइकोलॉजी क्या है और किस प्रकार यह मानव मस्तिष्क के बारे में जानकारी देता हैं।

 

कई लोगों को लगता है कि साइकोलॉजी पढ़ने से हम लोगों की मन की बात को जान सकते है यह बात कुछ हद तक सही भी है क्योंकि साइकोलॉजी हमें बताता है कि किस प्रकार के फैसले मनुष्य किस स्थिति में लेता है और मनुष्य के लेने वाले फैसले और उसके कार्यों में किस प्रकार की समानताएं होती है इन सभी बातों को विस्तार पूर्वक समझने के लिए आप Psychology In Hindi के इस लेख के साथ अंत तक बनी रहे।

 

Psychology In Hindi

सरल भाषा में कहें तो सायकोलॉजी एक पढ़ाई है इस पढ़ाई में मानव मस्तिष्क के बारे में पढ़ाया जाता है। हमारा मस्तिष्क किस प्रकार कार्य करता है इसके बारे में जानकारी देते हुए इस तरह की पढ़ाई में आपको बताया जाता है कि पशु, पक्षी या मानव किस प्रकार फैसले लेते है या किस परिस्थिति में उनके कैसे फैसले होते है और हमारे रोजमर्रा के जीवन में बीता हुआ घटना हमारे अस्तित्व को किस प्रकार बदलता है और इन सब से मस्तिष्क पर कैसा असर पड़ता है। इसके बाद इन सब से कैसे उभरा जाता है, इसकी विस्तार पूर्वक जानकारी आपको साइकोलॉजी में पढ़ाई जाती हैं।

 

साइकोलॉजी में मस्तिष्क प्रशिक्षण के दौरान आपको पढ़ाया जाता है मस्तिष्क की क्रियाओं के बारे में जैसे – संवेदना, अवधान, चिंतन जैसे कुछ जरूरी कार्य है जो हमारा मस्तिष्क से करता है हमेशा से यह चिंता का विषय बना रहा है कि आखिर मानव मस्तिष्क किस प्रकार कार्य करता है और हमारे मन में विचार कहां से आते है मगर आज भी मनोविज्ञान में बहुत सारी ऐसी चीजें है जो हमें नहीं पता।

 

मनोविज्ञान का इतिहास

अगर हम साइकोलॉजी या मनोविज्ञान के इतिहास की बात करें यह काफी पुराना विषय है जो 16 वी सदी में लोगों के सामने आया। ऐसा नहीं है कि 16 मी सदी से पहले हम मनोविज्ञान को नहीं जानते थे मगर 16 मी सदी में सिगमंड फ्रायड के आने से पहले मनोविज्ञान को किसी भी प्रकार का होता नहीं दिया गया था।

 

सिगमंड फ्रायड वह पहले व्यक्ति थे जिन्होंने मनोविज्ञान को विज्ञान का उदय दिलाया उन्होंने हमें बताया कि मनोविज्ञान में किसी मस्तिष्क की कार्यप्रणाली को समझना भी एक विज्ञान का हिस्सा है। उसके बाद वर्ष 1879 में विलियम वोट नाम के एक व्यक्ति ने साइकोलॉजी की प्रयोगशाला शुरू की और उन्हें आधुनिक मानव विज्ञान का पिता कहा गया। वोट मनोविज्ञान की एक नई परिभाषा दी उन्होंने कहा कि “व्यक्तियों के आपसी व्यवहार और उनके संबंधों की अध्ययन को मनोविज्ञान कहते है”।

 

इस प्रकार वक्त के साथ मनोविज्ञान के अनेकों परिभाषा हमारे समक्ष आए अगर हम किसी एक परिभाषा की बात करें तो मनोविज्ञान केवल पढ़ाई है जिससे हम मानव किस प्रकार चिंतन और संवेदना व्यक्त करने के लिए फैसले लेता है उसका अध्ययन करते हैं।

 

इस अध्ययन को पहले समाज में विज्ञान का स्तर नहीं मिला था सायमंड फ्रॉड के आने के बाद इसे एक विज्ञान का अस्तर मिला और विलियम वोट जैसे लोगों ने मनोविज्ञान को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया और आज यह विज्ञान की एक प्रतिष्ठित श्रेणी बन चुकी हैं।

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मनोविज्ञान के प्रकार

जैसा कि हमने आपको बताया मनोविज्ञान एक वैज्ञानिक तरीका है जिसमें लोगों के मानसिक स्थिति को ठीक किया जाता है इस प्रक्रिया में इस विज्ञान को कई विभागों में विभाजित किया गया मुख्य तौर पर मनोविज्ञान को चार भागों में विभाजित किया गया है जैसे – व्यवहारिक, संज्ञानात्मक, विकासात्मक और शैक्षिक मनोविज्ञान।

 

1. व्यावहारिक मनोविज्ञान

आपको जानकर आश्चर्य होगा कि हमारा व्यवहार है किसके प्रति कैसा है यह एक प्रकार का विज्ञान है अर्थात मस्तिष्क विभिन्न परिस्थितियों में विभिन्न प्रकार के लोगों से विभिन्न तरीकों का व्यवहार रखता है। मानव का व्यवहार इतना अजीब होता है कि हमें उसका अध्ययन करने की आवश्यकता पड़ती है जब हम मानो या पशु पक्षी के व्यवहार का अध्ययन करते है तो उसे व्यावहारिक मनोविज्ञान कहते हैं।

 

2. संज्ञानात्मक मनोविज्ञान

कोई छोटा बच्चा अलग-अलग परिस्थितियों में जैसा व्यवहार करता है एक बड़ा इंसान वैसा व्यवहार नहीं करता साथ ही हम अपने जीवन में अलग परिस्थिति में अलग तरीके से व्यवहार करते है हमें कैसा व्यवहार करना चाहिए और अगर हम अपने फैसलों की वजह से किसी परिस्थिति में फंस जाएं तो वहां से किस प्रकार बाहर निकले इसकी एक विस्तारपूर्वक तरीके की अध्ययन करवाई जाती है जिसे संज्ञानात्मक मनोविज्ञान कहते हैं।

 

3. विकासात्मक मनोविज्ञान

बच्चा विकास करता है और किस प्रकार उसकी मानसिक और शारीरिक विकास हो रही है इस प्रक्रिया को समझने के लिए विकासात्मक मनोविज्ञान की पढ़ाई करवाई जाती है जिसमें बच्चों का मानसिक और शारीरिक रूप से सही विकास हो इसके बारे में जानकारी दी जाती हैं।

 

4. शैक्षिक मनोविज्ञान

आधुनिक दौर में एक विद्यार्थी का मान्य किस प्रकार कार्य कर रहा है एक शिक्षक को यह जानने की आवश्यकता है किस प्रकार एक विद्यार्थी अपने मन को काबू कर सकता है और एक शिक्षक को किन बातों का मुख्य तौर पर ध्यान देना चाहिए अपने विद्यार्थी को शिक्षा देते वक्त इन सभी बातों को विस्तार पूर्वक समझाने के लिए शैक्षिक मनोविज्ञान का अध्ययन करवाया जाता हैं।

 

साइकोलॉजी की पढ़ाई कैसे करें

आज मनोविज्ञान की पढ़ाई काफी तेजी से प्रचलित हो रही है आधुनिक युग में बहुत सारे ऐसे नहीं विद्यार्थी उभर कर आए है जो साइकोलॉजि को पढ़ना चाहते है इसकी पढ़ाई करने के लिए आपको आर्ट्स सेक्शन को चुनना पड़ेगा दसवीं पास करने के बाद आप मनोविज्ञान विषय चुनकर 11वीं और 12वीं की पढ़ाई कर सकते हैं।

 

11वी और 12वीं में मनोविज्ञान की पढ़ाई करने के बाद आपको स्नातक का विषय चुनना होगा जिसमें 3 साल मनोविज्ञान में BA करने के बाद आप अगर आगे और पढ़ना चाहते हो तो मनोविज्ञान में MA कर सकते है जो 2 साल की अवधि का होता है। इसके बाद आप पीएचडी कर सकते हैं।

 

इन सभी पढ़ाई ओं को करने के बाद आप किसी कंपनी में साइकोलॉजी की पोस्ट के लिए आवेदन कर सकते है और इसके अलावा आप अपना खुद का साइकोलॉजी बिजनेस भी शुरू कर सकते हैं।

 

मनोविज्ञान की उपयोगिता

आजकल इंटरनेट पर अलग-अलग जगह मनोविज्ञान की प्रचलिता बड़ी तेजी से बढ़ रही है बहुत सारे लोग इसके अलग-अलग क्षेत्र में उपयोग को समझना चाहते है, हम मनोविज्ञान के रोजमर्रा के जीवन में उपयोग को समझाने के लिए कुछ उपयोगी बिंदुओं को सूचीबद्ध किए हैं।

 

1. मनोविज्ञान का महत्व शिक्षा में है

मनोविज्ञान का सबसे बड़ा महत्व शिक्षा और व्यक्तित्व में है एक पढ़ाई के रूप में मनोविज्ञान में पढ़ाया जाता है जिसमें बच्चों को सिखाया जाता है कि अच्छा व्यवहार कैसे करते है सही गलत का पहचान कैसे करते है किसी व्यक्ति पर कब विश्वास करना चाहिए किसी व्यक्ति के व्यक्तित्व को कैसे पढ़ा जाता है जैसे कुछ आवश्यक जानकारी दी जाती है जिसके आधार पर वह इंसान और इंसानियत को करीब से समझ पाते है, और अपने जीवन में विषम परिस्थिति में सही फैसला लेने की समझ विकसित कर पाते हैं।

 

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इसी आधार पर मनोविज्ञान को अलग-अलग भाग में विभाजित भी किया जाता है जैसे बच्चों का मनोविज्ञान बड़ों का मनोविज्ञान और इन सभी क्षेत्र में नौकरी के अलग-अलग अवसर भी खुलते जाते हैं।

 

2. आने वाले समय में मनोविज्ञान की आवश्यकता नौकरी के क्षेत्र में पड़ेगी

जितनी तेजी से हम मोबाइल पर निर्भर होते जा रहे है हमारा दिमाग सही तरीके से विकसित नहीं हो पा रहा सामने वाले व्यक्ति को देखकर आप उसके समझदारी का अंदाजा नहीं लगा सकते इसलिए मनोवैज्ञानिक की आवश्यकता पड़ती है क्योंकि उनके पास काला होता है किसी के व्यक्तित्व को पढ़ने का मनोविज्ञान वह कला है जिसके आधार पर किसी व्यक्ति को सही परामर्श दे सकते है इस वजह से कंसलटिंग का व्यापार भी इस क्षेत्र में बड़ी तेजी से फल-फूल रहा हैं।

 

हम यह कह सकते है कि आने वाले समय में मनोविज्ञान के जरिए आप कंसलटिंग के क्षेत्र में अपना व्यापार बना सकते है, या बड़ी बड़ी कंपनी में मनोवैज्ञानिक के पद पर नौकरी कर सकते है इसके अलावा आने वाले समय में मनोविज्ञान के क्षेत्र में शिक्षक के रूप में भी कार्य कर सकते हैं।

 

3. मोटिवेशन या परामर्श में मनोविज्ञान की आवश्यकता है

आजकल बड़ी-बड़ी क्षेत्र में मोटिवेशन की आवश्यकता पड़ रही है एक मोटिवेशन स्कूटर का काम करने के लिए आपको मनोविज्ञान की समझ होनी चाहिए ताकि आप अलग-अलग परिस्थिति में सही फैसला ले सके और लोगों के व्यक्तित्व को समझ सके इसके अलावा किसी को परामर्श देने या कंसलटिंग के व्यापार में मनोविज्ञान की भारी आवश्यकता होती हैं।

 

अगर आप किसी को सही परामर्श देना चाहते है और अपने घर में भी आपको सही फैसले लेना चाहते है, तो इसके लिए आपको मनोविज्ञान की समझ होना आवश्यक हैं।

 

4. चिकित्सा के क्षेत्र में मनोविज्ञान का उपयोग

आजकल हम जितना ज्यादा मोबाइल और कंप्यूटर पर निर्भर हो रहे है, हमारे दिमाग पर उतना ही ज्यादा इन सबका असर पड़ रहा है जिस वजह से दिमागी रूप से परेशान बहुत सारे लोग मिल रहे है आज एंग्जाइटी डिप्रेशन एक साधारण समस्या बन चुकी है मगर यह समस्या बड़ी विकट रूप ले लेती है जिसका इलाज एक मनोवैज्ञानिक के हाथ में होता है अर्थात आने वाले समय में चिकित्सा के क्षेत्र में मनोविज्ञान की भीषण आवश्यकता पड़ने वाली है आज से ही हम मनोविज्ञान की आवश्यकता को बड़ी तेजी से भाप सकते हैं।

 

5. अलग-अलग व्यापार में मनोविज्ञान की आवश्यकता

चाहे आप कोई भी व्यापार कर रहे हो आप का ग्राहक क्या चाहता है उसकी हरकत से उस बात को पकड़ना है या फिर आपका कोई क्लाइंट आपसे क्या चाहता है इसे समझने के लिए आपको मनोविज्ञान की समझ होना आवश्यक है मनोविज्ञान के समय होने की वजह से आपको अपने व्यापार के उतार-चढ़ाव को आने से पहले ही समझ पाएंगे और मनोविज्ञान के समझ होने पर आप अलग-अलग व्यापार में सही व्यापारिक फैसले ले पाएंगे और अपने व्यापार को सफल बना पाएंगे।

 

स्कोप ऑफ साइकोलॉजी

अगर आप साइकोलॉजी की पढ़ाई करने के बाद इसमें अपना भविष्य ढूंढ रहे है तो आपको बता दें कि ऐसी कोई पढ़ाई नहीं है जिसमें आप एक अच्छा भविष्य ना बना सके अगर आप मनोविज्ञान की पढ़ाई अच्छे से करते है तो आज इसमें विभिन्न प्रकार की नौकरियां आ गई है और आप अपना बहुत अच्छा भविष्य बना सकते हैं।

 

कंपनी में मनोवैज्ञानिक: अगर हम मनोविज्ञान रखी पढ़ाई से मिलने वाली नौकरी की बात करें तो आज लगभग हर कंपनी एक मनोवैज्ञानिक को नौकरी देना चाहती है ताकि वह कस्टमर के हावभाव को अच्छे से समझ सके और अच्छे तरीके से कंपनी का सामान्य या सर्विस बिक सके इसके अलावा किसी भी कंपनी को नौकरी दिए हुए लोगों को सैलरी देना पड़ता है कम से कम सैलरी में अच्छे से अच्छे लोगों को हायर करने के लिए भमनोवैज्ञानिक की आवश्यकता पड़ती है इस वजह से अगर आप मनोवैज्ञानिक के पढ़ाई करते है तो आपको किसी भी कंपनी में अच्छे पोस्ट पर अच्छी तनख्वाह की नौकरी मिल सकती हैं।

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शिक्षा के क्षेत्र में मनोवैज्ञानिक: आज मनोवैज्ञानिकों की जरूरत है शिक्षा के क्षेत्र में भी है ताकि बच्चों को विभिन्न प्रकार के शिक्षा का महत्व बताया जा सके और बच्चों को पढ़ने के बाद क्या करें यह सोचने की दुविधा ना हो मनोवैज्ञानिक की जरूरत है बड़े-बड़े स्कूल कॉलेज में ना केवल प्रोफेसर के तौर पर बल्कि एक काउंसलर के तौर पर भी होती हैं।

 

मनोवैज्ञानिक बनकर अपना व्यापार: इसके अलावा आप अपना खुद का साइकोलॉजी लॉक खोल सकते है अर्थात ऑनलाइन युग के आने से लोग साइकोलॉजिस्ट या मनोवैज्ञानिक से ऑनलाइन बात करना चाहते है अगर आप एक अच्छे मनोवैज्ञानिक है तो आप अपना ऑनलाइन पोर्टल शुरू कर सकते है जहां पर लोग आपसे बात करने और अपनी समस्या का समाधान ढूंढने के बदले आपको पैसे देंगे और आपको बता दें यह व्यापार आज बड़ी तेजी से फल-फूल रहा हैं।

 

मनोवैज्ञानिक कितना कमाते है

अगर आप इस बारे में विचार कर रहे है कि इस पढ़ाई को पढ़ने के बाद आप कितना कमाएंगे तो आपको बता दें कि एक मनोवैज्ञानिक बहुत अच्छा पढ़ाई है जिससे आप अच्छा खासा तनख्वाह हर महीने कमा सकते है।

 

अगर आप मनोवैज्ञानिक किसी कंपनी के लिए बनते है तो कंपनी ₹50000 से ₹100000 तनख्वाह देती है इसके अलावा अगर आप किसी कॉलेज में प्रोफेसर बनते है तो वह भी आपको इतनी सी तनख्वाह मिलती है मगर जब आप तो खुद का काउंसलिंग भेजना शुरू करते है यह आपके कार्य कुशलता पर निर्भर करता है और आज मनोवैज्ञानिक इससे कहीं ज्यादा रुपया हर महीना कमा रहे हैं।

 

मनोविज्ञान के फैक्ट

मनोविज्ञान के अलग-अलग क्षेत्र होते है और प्रत्येक क्षेत्र में मनोविज्ञान के एक से एक फैक्ट आपको देखने को मिलेंगे जिन्हें जानने के बाद आप सोच में पड़ जाएंगे। आज मनोविज्ञान जुड़े ऐसे ही कुछ बेहतरीन फैक्ट आपके समक्ष प्रस्तुत किए जा रहे हैं।

 

मेडिकल फील्ड में मनोविज्ञान के फैक्ट

इंसानी व्यक्तित्व में मनोविज्ञान के फैक्ट

चाइल्ड साइकोलॉजी से जुड़े कुछ फैक्ट

साइकोलॉजी के बारे में पूछे जाने वाले प्रश्न

यहाँ पर मैंने ऐसे कुछ सवालों के जवाब दिए हुए जो की अक्सर लोग साइकोलॉजी के बारे में पूछते रहते हैं।

 

Q. मनोविज्ञान क्या हैं?

मनोविज्ञान एक पढ़ाई है जिसमें आपको मानव मस्तिष्क किस प्रकार कार्य करता है और विभिन्न फैसलों में कैसे फटता है साथ ही किसी परिस्थिति में फंसे हुए दिमाग को किस प्रकार बाहर लाया जाए इसके बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी दी जाती हैं।

 

Q. मनोविज्ञान की पढ़ाई कितने वर्ष की होती हैं?

मनोविज्ञान एक विषय है जिससे आप अपनी 11वीं और 12वीं कक्षा में चुन सकते है इसके बाद स्नातक की पढ़ाई में मनोविज्ञान को चुनने पर 3 वर्ष की पढ़ाई करनी होगी उसे करने के बाद आप पोस्ट ग्रेजुएशन के लिए स्नातक की पढ़ाई कर सकते है जिसमें 2 वर्ष की पढ़ाई होगी इसके अलावा 1 वर्ष के पीएचडी भी की जाती हैं।

 

Q. साइकोलॉजी से हम क्या सीखते हैं?

साइकोलॉजी या मनोविज्ञान हमें सिखाता है कि मनुष्य किस प्रकार फैसले लेता है और अपने सगे संबंधियों के साथ उसके व्यवहार कैसे होते है। इसके अलावा हम अपने फैसलों की वजह से विभिन्न परिस्थितियों में फंस जाते है वहां से उभरने के लिए मानव मस्तिष्क का अध्ययन करने का तरीका बताता हैं।

 

निष्कर्ष

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